पत्नी की दोनों किडनी हो चुकी थी ख़राब, तब पति ने कहा मै अपनी किडनी दूंगा ,लेकिन जब पति की हुई जाँच तो उड़ गये सबके होश

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आज कल के बदलते खान पान की वजह से किडनी की परेशानी से ज्यादातर लोग परेशान है|शुरुआती दौर में लोग इस बीमारी को समझ नहीं पाते जो बाद में धीरे धीरे गम्भीर रूप ले लेती है और जानलेवा साबित होती है |आज हम आपको एक ऐसी ही खबर बताने जा रहे है जिसे जानकर आपको भी रिश्ते की अहमियत का अंदाजा लग जायेगा|

दरअसल ये मामला है सीकर जिले की श्रीमाधोपुर तहसील के गांव ढाबावाली  का जहाँ के मूल निवासी दशरथ मीणा पिछले दो वर्षों से स्थानीय आदर्श पुलिस थाने में हैडकांस्टेबल पद पर पोस्टेड हैं और इनकी पत्नी जो की 33 साल की है वो करीब डेढ़ साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित है |दशरथ अपनी पत्नी के इलाज के लिए लाखों रुपये खर्च कर चुके है और दशरथ की पत्नी का कई बार डायग्नोसिस भी हो चुका है।

लेकिन उनकी पत्नी के स्वास्थ में किसी भी तरह का कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा था और डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया था फिर एक बार जाँच के दौरान डॉक्टरों ने कहा की अगर इन्हें किसी की किडनी मिल जाये तो इनकी जान बच सकती है इसपर ललिता के पति ने तुरंत अपनी किडनी देने को तैयार हो गये |

दशरथ ने बताया की जब डॉक्टरों ने कहा की यदि उनकी पत्नी का किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हुआ तो  उनकी जान नहीं बच पायेगी और ये बात सुनकर दशरथ के तो जैसे पैरों तले जमीन ही खिसक गयी तब उन्होंने  अपनी किडनी देने की बात कही लेकिन जब डॉक्टरों ने उनकी जाँच की तो इस बात का पता चला की दशरथ के पास खुद एक ही किडनी है जिस वजह से वो अपनी किडनी नहीं दे सकते और ये बात जानने के बाद दशरथ की उम्मीद ही टूट गयी |

इसके बाद दशरथ ने इस बारे में अपने परिजनों और ससुराल वालों को बताया तो हर कोई उनकी मदद के लिए अपनी किडनी डोनेट करने के लिए तैयार हो गये लेकिन किसी का भी ब्लड मैच ना होने कारण कोई भी अपनी किडनी ललिता को ना सका यहाँ तक की ललिता के माँ बाप भाई बहन किसी का भी ब्लड ग्रुप ललिता से मैच न हो सका और ऐसा होनी के बाद दशरथ पूरी तरह से टूट गये क्योंकि उन्हें लगा की अब वो अपनी पत्नी को बचा नहीं पाएंगे और उनके 15 साल की बेटी व 13 साल के बेटे के चेहरे बार-बार सामने आने लगे और वे यही सोचते रहे की आखिर वे अपने बच्चो को क्या जवाब देंगे अगर उनकी माँ को कुछ हो गया |

लेकिन इसी दौरान दशरथ के बड़े भाई शिवपाल  जो खेती बाड़ी का काम करते है वो भी आये और उन्होंने डॉक्टरों से कहा की एक बार मेरी भी किडनी की जाँच कर ले हो सकता है वो मैच कर जाये  और यह किसी चमत्कार से कम नहीं था की अंतिम बार ललिता की जेठ की किडनी की जब जाँच हुई तो वो मैच कर गयी और उन्होंने अपनी एक किडनी ख़ुशी ख़ुशी डोनेट कर दिया  और अब दोनों ही  खतरे से बाहर है |

अपने बड़े भाई के इस एहसान के बाद दशरथ को समझ में नहीं आ रहा है की वो उनका शुक्रिया किस तरह अदा करें लेकिन उन्होंने बस यही कहा है की आह मेरे बड़े भाई की वजह से मेरे बच्चो का भविष्य और मेरी पत्नी की जान बच गयी और आज अगर मेरी पत्नी जीवित है तो वो सिर्फ और सिर्फ मेरे बड़े भाई की वजह से |